मन को समझने की एक शांत जगह
कभी ऐसा लगता है कि
सब कुछ ठीक चल रहा है…
फिर भी भीतर कुछ भारी है?
काम है, रिश्ते हैं, ज़िम्मेदारियाँ हैं —
फिर भी मन में बेचैनी, उलझन या थकान बनी रहती है।
अक्सर हम इसका हल बाहर ढूँढते हैं —
सलाह, उपाय, भविष्य, भरोसा।
लेकिन क्या आपने कभी देखा है
कि ये परेशानी मन में बन कैसे रही है?
यहाँ क्या अलग है?
Jyotisa कोई उपाय देने की जगह नहीं है।
यहाँ भविष्य नहीं बताया जाता।
यह astrology या Jyotish नहीं है।
Jyotisa शब्द Jyoti से आया है —
जिसका अर्थ है भीतर की स्पष्टता।
यह एक शांत जगह है
जहाँ मन को वैसे ही देखा जाता है
जैसा वह अभी है।
Yoga Vasiṣṭha क्या है यहाँ?
Yoga Vasiṣṭha को अक्सर एक धार्मिक ग्रंथ समझ लिया जाता है।
लेकिन असल में यह
मन को समझने की एक गहरी बातचीत है।
यह कहता नहीं कि
“ऐसा मानो” या “ऐसा करो”।
यह बस पूछता है:
जो तुम अनुभव कर रहे हो, वह बन कैसे रहा है?
जब यह समझ साफ़ होती है,
तो कई उलझनें अपने आप हल्की पड़ जाती हैं।
यहाँ कौन आते हैं?
अक्सर ऐसे लोग जो महसूस करते हैं:
भीतर लगातार दबाव बना रहता है
बार-बार वही सोच और भावनाएँ लौट आती हैं
रिश्तों में समझ की कमी महसूस होती है
जीवन की दिशा को लेकर उलझन है
सब होने के बाद भी संतोष नहीं है
यह जगह बेहतर बनने के लिए नहीं है।
यह जगह समझने के लिए है।
यहाँ क्या नहीं होता (यह जानना ज़रूरी है)
कोई उपाय नहीं दिए जाते
कोई भविष्यवाणी नहीं होती
कोई मंत्र या तकनीक नहीं सिखाई जाती
कोई समाधान promise नहीं किया जाता
कोई गुरु-शिष्य रिश्ता नहीं बनाया जाता
यहाँ सिर्फ़ ईमानदार बातचीत होती है।
सत्र कैसे होते हैं?
सत्र एक शांत बातचीत की तरह होते हैं —
जहाँ आप यह देखते हैं कि:
सोच कैसे चल रही है
भावनाएँ कैसे बन रही हैं
दबाव भीतर कैसे पैदा हो रहा है
कोई सही-गलत नहीं।
कोई लक्ष्य नहीं।
कोई सुधार की दौड़ नहीं।
शुरुआत कैसे करें?
आप एक free clarity session से शुरुआत कर सकते हैं।
सिर्फ़ यह देखने के लिए
कि यह तरीका आपके लिए सही है या नहीं।
कोई दबाव नहीं।
कोई commitment नहीं।
एक छोटी-सी बात
Yoga Vasiṣṭha कहता है —
दुख जीवन से नहीं,
गलत समझ से पैदा होता है।
जब समझ बदलती है,
तो अनुभव भी बदलता है।
उस जीवन की ओर पहला कदम बढ़ाएँ जिसके आप हकदार हैं
300 से अधिक लोगों ने अपनी आत्मविश्वास वापस पाया, रिश्तों को सुधार लिया और भावनात्मक शांति पाई है। आप भी ऐसा कर सकते हैं।


