जिस क्षण आप अपने जीवन को देखते हैं, आप क्या देखते हैं? पुरानी यादें, पुरानी गलतियां, पुरानी चोटें... और इन सबके बीच एक कड़वाहट जो आपको हर रोज़ घसीटती है। आप सोचते हैं कि ये सब सच है। कि ये आपका अतीत है। लेकिन योग वशिष्ठ कुछ और ही कहता है।
आपकी किसी भी घटना की स्मृति वास्तव में कल्पना है। यह सच नहीं है।
यह बात पहली बार सुनने में अजीब लगती है, लेकिन इसे समझिए। जब आप किसी घटना को याद करते हैं—चाहे वह कोई दर्द हो, किसी की बुरी बात हो, या कोई असफलता—तो आप उसे फिर से अपने मन में रच रहे हैं। आप अपनी कल्पना से उसे वापस बना रहे हैं।
उस समय जो हुआ था, वह अब नहीं है। वह एक तस्वीर थी जो अब धुंधली पड़ गई है। लेकिन हर बार जब आप उसे याद करते हैं, आप उसे नए रंगों से, नए दर्द से, नई भावनाओं से रंग देते हैं।
यही तो असली समस्या है।
Dikshaant
Feb 13, 2026
10
mins
Reading time
कल्पना का जाल: कैसे आपकी स्मृति आपको बांधती है
आपके मन में हजारों यादें हैं। बचपन में माता-पिता ने क्या कहा? स्कूल में किसी ने क्या सोचा? किसी रिश्ते में क्या गलत हुआ? और अब जब आप इन सब को याद करते हैं, तो आप सिर्फ याद नहीं कर रहे—आप उन्हें अपने आज में जीवित कर रहे हैं।
यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है।
आपकी अब की पीड़ा असल में उन पुरानी यादों की कल्पना नहीं है—वह आपके द्वारा बार-बार याद करने का परिणाम है। आप हर दिन उसी घाव को खुजलाते हैं, और फिर आश्चर्य करते हैं कि वह भरता क्यों नहीं।
आपके मन में एक पूरी दुनिया है जो कल्पना से बनी है:
"मैं काफी अच्छा नहीं हूं" (कल्पना)
"मुझसे हमेशा गलती होती है" (कल्पना)
"लोग मेरे बारे में बुरा सोचते हैं" (कल्पना)
"यह रिश्ता कभी ठीक नहीं हो सकता" (कल्पना)
और ये कल्पनाएं इतनी वास्तविक लगती हैं कि आप अपनी पूरी ज़िंदगी उन्हीं के ईर्द-गिर्द बुनते हैं।
भूलना ही मुक्ति है
लेकिन यहीं योग वशिष्ठ का सुंदर सत्य आता है: भूलना ही असल में आपका सबसे बड़ा उपहार है।
जब आप किसी यादको भूल जाते हैं, तो क्या होता है?
वह याद अब आपको बार-बार दर्द नहीं देती।
वह आपके फैसलों को नियंत्रित नहीं करती।
वह आपके संबंधों में ज़हर नहीं घोलती।
भूलना एक अभिशाप नहीं है। भूलना साधारण ज्ञान है।
सोचिए, अगर आप अपने जीवन की हर छोटी-मोटी घटना को याद रखते—हर बार जब कोई आपके साथ गलत व्यवहार करे, हर बार जब आपको असफलता मिले, हर बार जब आप किसी को निराश करें—तो आपका मन एक कचरे का डिब्बा बन जाता। और यही तो हो रहा है।
आपका मन इस समय अपनी कल्पनाओं से भरा हुआ कचरा है।
मन को साफ करना: योग वशिष्ठ का तरीका
योग वशिष्ठ कहता है: "अपने सभी पूर्व संस्कारों को अपने मन से मिटा दो, जैसे वह कभी मन में हुए ही नहीं। जो कुछ भी तुमने महसूस किया है या नहीं महसूस किया है, उसे भी भुला दो। फिर मौन और एकांत में बैठ जाओ, एक पत्थर की तरह।"
यह बात सुनने में कठोर लगती है, लेकिन यह स्वतंत्रता की बात है।
मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि आप जानबूझकर अपनी पुरानी स्मृतियों के बारे में सोचना बंद कर दें। जब कोई पुरानी बातअपने आप याद आएं, तो उन्हें निर्लिप्त भाव से देखें—जैसे कि आप किसी फिल्म को देख रहे हों। उसमें न फंसें। उसे सच न मानें। उससे सीखें, लेकिन उसे अपने साथ न ले जाएं।
यह एक तरह की आध्यात्मिक भूलना है। यह भूलना नहीं है, यह मुक्ति है।
रोजमर्रा की जिंदगी में इसे कैसे लागू करें?
आपके रिश्ते में: अगर आपका पार्टनर आपसे कुछ गलत व्यवहार कर गया, तो उसे फिर-फिर याद न करें। उस घटना को एक सबक मानिए, पर पुरानी स्मृति को अपने साथ न ले जाइए। जब अगली बार मिलें, तो उस पुरानी चोट के साथ न आइए।
आपकी आत्मा में: अगर आप किसी चीज़ में असफल रहे, तो वह सीखने का मौका है, पर आप विफल हैं यह विश्वास न पकड़ें। यह कल्पना है। वह घटना अब नहीं है।
आपकी चिंता में: जब भविष्य की चिंता आए (जो असल में भी कल्पना है), तो याद रखिए—अभी तक कुछ हुआ नहीं। आप एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जो अभी मौजूद नहीं है।
मन की खामोशी: अंतिम सच
जब आप सभी यादों को छोड़ देते हैं, तब क्या बचता है? सिर्फ मौन बचता है।
लेकिन यह मौन उदास नहीं है। यह मौन शांत है, स्पष्ट है, जीवंत है।
इसी मौन में आपकी असली प्रज्ञा जागती है। इसी मौन में आप पहली बार आप बनते हैं—न कि आपकी यादों के गुलाम।
योग वशिष्ठ कहता है कि एक पत्थर की तरह मौन रहो। पत्थर को कोई परवाह नहीं कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं। पत्थर को अपने अतीत की चिंता नहीं है। पत्थर बस है।
और यही तो आपकी असली प्रकृति है—बस होना। न कुछ साबित करना, न कोई स्ट्रगल, न कोई छवि।
जब आप इस जगह पहुंचते हैं, तब आपकी असली ज़िंदगी शुरू होती है।
अपने आप से पूछिए:
क्या आप अपनी पुरानी यादों के बोझ को हल्का करना चाहते हैं? क्या आप जानना चाहते हैं कि आपका मन कैसे काम करता है? क्या आप उस शांति को महसूस करना चाहते हैं जो तब आती है जब आप अपनी कल्पनाओं से मुक्त हो जाते हैं?
यह यात्रा अकेली नहीं होनी चाहिए। अगर आप अपने मन को गहराई से समझना चाहते हैं—अपनी यादों से, अपनी चिंताओं से, अपनी पुरानी पीड़ाओं से—तो एक ईमानदार बातचीत शुरू करें।
यदि आप चाहें, तो इस प्रक्रिया को समझने और अभ्यास में उतारने के लिए
अपना प्रश्न भेज सकते हैं।
शांति की शुरुआत सही प्रश्न से होती है।


